मालन नदी में साल भर पहले बनी करोड़ों की सुरक्षा दीवार का नामोनिशान मिटा, पूर्व कैबिनेट मंत्री माननीय श्री सुरेन्द्र सिंह नेगी जी मौके पर पहुंचे

 

 

मालन नदी में बने तटबंधों एवं सुरक्षा कार्यों की स्थिति का जायजा लेने के लिए पूर्व कैबिनेट मंत्री *माननीय श्री सुरेन्द्र सिंह नेगी जी ने आज क्षेत्र का स्थलीय निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान मालन नदी के पुल के उत्तरी और पश्चिमी भाग में बने सुरक्षा कार्यों की स्थिति ने निर्माण कार्यों की गुणवत्ता को लेकर एक बड़ा अंतर सामने रखा। निरीक्षण के दौरान सामने आया कि पुल के उत्तरी भाग में लगभग सालभर पहले बाहरी ठेकेदारों द्वारा करोड़ों रुपये की लागत से बनाई गई सुरक्षा दीवार मालन पूरी तरह बह गई है। मौके पर अब उसका नामोनिशान तक दिखाई नहीं दे रहा है। *वहीं दूसरी ओर पुल के पश्चिमी भाग में पूर्व कैबिनेट मंत्री श्री सुरेन्द्र सिंह नेगी जी के कार्यकाल के दौरान लगभग 14-15 वर्ष पहले मात्र 27 से 30 लाख रुपये की लागत से स्थानीय ठेकेदारों के माध्यम से बनाई गई सुरक्षा दीवार आज भी पूरी तरह सुरक्षित और मजबूती से खड़ी है*।

मालन नदी के दोनों हिस्सों की यह तस्वीर अपने आप में निर्माण कार्यों की गुणवत्ता को लेकर बड़ा सवाल खड़ा कर रही है। एक ओर करोड़ों रुपये खर्च करने के बावजूद सालभर के भीतर ही सुरक्षा दीवार पूरी तरह बह गई, जबकि दूसरी ओर 14-15 वर्ष पहले स्थानीय ठेकेदारों द्वारा बनाया गया कार्य आज भी नदी के तेज बहाव के बीच मजबूती से खड़ा है।

नेगी जी ने मौके पर बताया कि उनके कार्यकाल के दौरान वर्ष 2013-14 में स्थानीय ठेकेदारों के माध्यम से मालन नदी क्षेत्र में लगभग 1.5 किलोमीटर बाढ़ सुरक्षा एवं प्रोटेक्शन वर्क कराया गया था। इसका मुख्य उद्देश्य नदी के बहाव से होने वाले भूमि कटाव को रोकना और आसपास की कृषि भूमि एवं किसानों के खेतों को सुरक्षित रखना था। आज इतने वर्षों बाद भी यह सुरक्षा दीवार सुरक्षित है। इसके चलते आसपास की कृषि भूमि और फसलें भी सुरक्षित रही हैं। जिस क्षेत्र को भूमि कटाव से बचाने के उद्देश्य से यह कार्य कराया गया था, वहां समय के साथ पेड़-पौधे और हरित क्षेत्र भी विकसित हुआ है, जिससे भूमि संरक्षण में मदद मिली। *पूर्व कैबिनेट मंत्री श्री सुरेन्द्र सिंह नेगी जी ने कहा कि निर्माण कार्यों में स्थानीय ठेकेदारों की क्षमता, अनुभव और कार्य की गुणवत्ता को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए*। उन्होंने कहा कि जब 27-30 लाख रुपये की लागत से स्थानीय ठेकेदारों के माध्यम से 14-15 वर्ष पहले कराया गया कार्य आज भी सुरक्षित है, तो करोड़ों रुपये की लागत से बाहरी ठेकेदारों के माध्यम से कराया गया कार्य सालभर में ही पूरी तरह बह जाने की स्थिति में कैसे पहुंच गया, यह गंभीर विचार का विषय है। उन्होंने कहा कि भारी-भरकम बाहरी ठेकेदारों को करोड़ों रुपये के कार्य देने मात्र से विकास सुनिश्चित नहीं होता। विकास की असली पहचान निर्माण की गुणवत्ता, मजबूती और टिकाऊपन से होती है। मालन नदी के पुल के उत्तरी और पश्चिमी भाग में सामने आई यह तस्वीर सरकारी निर्माण कार्यों की गुणवत्ता, ठेकेदारों के चयन, तकनीकी निगरानी और जनता के करोड़ों रुपये के इस्तेमाल पर गंभीर सवाल खड़े करती है। एक तरफ सालभर पहले करोड़ों रुपये में बनी सुरक्षा दीवार पूरी तरह बह गई और उसका नामोनिशान तक नहीं बचा, वहीं दूसरी ओर 14-15 वर्ष पहले मात्र 27-30 लाख रुपये में स्थानीय ठेकेदारों द्वारा बनाई गई सुरक्षा दीवार आज भी पूरी तरह सुरक्षित खड़ी है। नेगी जी ने कहा कि जनता के टैक्स का पैसा जनता की सुरक्षा और सुविधा के लिए खर्च होता है। ऐसे में प्रत्येक निर्माण कार्य में गुणवत्ता, पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना संबंधित विभाग और सरकार की जिम्मेदारी है।

 

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